Saturday, September 5, 2009
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जिस तरह अंधे को चलने के लिए लाठी का सहारा लेना परता है ठीक उसी प्रकार समाज को आगे बढाने के लिए साहित्य के सहारे को तलाशता है ! साहित्य ही मनुष्य को अपने हक के प्रति सचेत करता है व नया जीवन् जीने की कला सिखाता है! हमारे ज़्यादा टर दोस्त युवा है युवा वर्ग को आवश्कता है उचित मार्ग दर्शन व अनुशासन की ! अनुशासन से ही देश , राष्ट्र व समाज का हिट हो सकता है ! इस लिए सभी युवा साथियों से अनुरोध है की वे अपनी आवाज़ शक्तिशाली बनाए ताकि देश की एकता व अखण्डता को आँच न आए !
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